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आसमान में ‘रक्तिम चंद्र’ का अद्भुत नज़ारा: वर्ष का महत्वपूर्ण पूर्ण चंद्र ग्रहण आज, जानिए कब और कैसे देखें यह दुर्लभ खगोलीय घटना

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मंगलवार को धरती, सूर्य और चंद्रमा एक ऐसी खगोलीय रेखा में आने वाले हैं, जो आसमान को रहस्यमय लालिमा से रंग देगी। वर्ष का महत्वपूर्ण पूर्ण चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे आरंभ होगा और शाम 6:48 बजे तक चलेगा। इसकी पूर्ण अवस्था 4:34 बजे से 5:33 बजे के बीच अपने चरम पर रहेगी। हालांकि भारत में अधिकतर लोग इसे चंद्रमा के उदय के समय अंतिम चरण में देख पाएंगे, फिर भी यह दृश्य खगोल प्रेमियों के लिए खास अवसर लेकर आया है।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन संभव है, जब तीनों पिंड लगभग एक सीधी रेखा में स्थित होते हैं। पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया—उम्ब्रा—में प्रवेश कर जाता है। इसी दौरान चंद्रमा लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे आम बोलचाल में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह लालिमा पृथ्वी के वायुमंडल की देन है। जब सूर्य का प्रकाश वातावरण से होकर गुजरता है, तो नीली और बैंगनी तरंगदैर्घ्य वाली किरणें अधिक बिखर जाती हैं, जबकि लाल और नारंगी रंग की रोशनी अपेक्षाकृत कम बिखरती है। यही लाल रोशनी मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है और उसे रक्तिम आभा प्रदान करती है। यही प्रक्रिया सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश को लाल रंग में रंग देती है।
भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण चंद्रमा के उदय के समय अंतिम चरण में दिखाई देगा। पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चंद्रमा अपेक्षाकृत पहले उदित होने के कारण पूर्ण अवस्था की अंतिम झलक भी देखी जा सकेगी। दक्षिण भारत के शहरों—जैसे चेन्नई और कन्याकुमारी—में यह दृश्य लगभग आधे घंटे तक स्पष्ट रह सकता है।
वैश्विक स्तर पर यह खगोलीय घटना एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में अलग-अलग चरणों में दिखाई देगी। अनुमान है कि दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी इस ग्रहण का कम से कम एक हिस्सा देख सकेगी। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी इसे विशेष रुचि के साथ देखा जाएगा।
खगोल विज्ञान के जानकारों के अनुसार, वर्ष 2028 के बाद ऐसा संयोग फिर बनेगा, इसलिए यह अवसर खास माना जा रहा है। अच्छी बात यह है कि चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है; इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर इसकी लालिमा और छाया के विभिन्न चरण और भी स्पष्ट नजर आते हैं।
आकाश में फैलती यह रक्तिम रोशनी केवल एक दृश्य भर नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सटीक खगोलीय गणना और प्रकृति की वैज्ञानिक प्रक्रिया का जीवंत प्रमाण है। यदि मौसम अनुकूल रहा, तो यह संध्या भारत समेत दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए एक अविस्मरणीय खगोलीय अनुभव बन सकती 

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